एक हाथ नहीं, फिर भी हौसला आसमान छूने काएक हाथ नहीं, फिर भी हौसला आसमान छूने का, रोज 50 किलोमीटर का सफर तय कर क्रिकेट सीख रहा नाम पंकज मावई ग्राम उझानी

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शेरगढ़ (मथुरा)। कहते हैं कि हौसले बुलंद हों तो कोई भी कमी इंसान की मंजिल के रास्ते में दीवार नहीं बन सकती। इस कहावत को सच कर दिखा रहे हैं गांव उझानी निवासी पंकज मावई। गरीब परिवार से आने वाले पंकज का एक हाथ नहीं है, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका जुनून और कुछ कर गुजरने का जज्बा किसी से कम नहीं है।पंकज अपने क्रिकेट के सपने को पूरा करने के लिए प्रतिदिन करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर SRBS बाजना क्रिकेट अकादमी पहुंचते हैं। घर से अकादमी और फिर अकादमी से वापस घर तक का लंबा सफर उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। शारीरिक चुनौती और आर्थिक परेशानियां भी उनके कदमों को रोक नहीं पा रही हैं।अभ्यास के दौरान पंकज पूरी मेहनत और लगन के साथ क्रिकेट की बारीकियां सीखते हैं। उनका सपना क्रिकेट के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपनी पहचान बनाना और परिवार का नाम रोशन करना है।पंकज की कहानी सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं, बल्कि हिम्मत, संघर्ष और जिद से मंजिल हासिल करने की कहानी है। वह उन युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो छोटी-छोटी परेशानियों से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं।पंकज का जज्बा यही संदेश देता है—हाथ एक हो या दो, अगर हौसला मजबूत हो तो सपनों की उड़ान को कोई नहीं रोक सकता।

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